जयपुर। नवरतन कोठारी अपने अनुभव और ज्ञान के साथ 1960 के दशक से केजीके समूह का नेतृत्व कर रहे हैं। एक समृद्ध वंश के साथ रत्न और आभूषण व्यवसाय उन्हें विरासत में मिला, वहीं उन्होंने इसे ऊंचाइयों तक पहुंचाने की चुनौती के तौर पर लिया और अपने प्रसिद्ध उपनाम के अलावा सब कुछ पीछे छोड़ते हुए चेन्नई में अपना पहला व्यावसायिक उद्योग शुरू किया। इसके बाद समूह का तेजी से विकास हुआ। केजीके समूह रत्नों के खनन और निर्माण के साथ ही हीरे की सोर्सिंग एवं निर्माण, ज्वेलरी मैन्युफैक्चरिंग और रियल एस्टेट का एक बहुराष्ट्रीय निगम है। इस समूह की मुख्य प्रेरक शक्ति नवरतन कोठारी रहे हैं। इनका वर्षों का व्यापार अनुभव और कौशल दुनियाभर में केजीके समूह को प्रेरणा देने का काम करता है। कोठारी कैंसर को लेकर राजस्थान के एकमात्र सुपर स्पेशियलिटी भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के संस्थापक अध्यक्ष भी हैं। इसके अलावा वे वर्ष 1993 से सुबोध शिक्षा समिति के अध्यक्ष के तौर पर भी कार्य कर रहे हैं। यह संस्थान सालाना 33 हजार से अधिक विद्यार्थियों को प्राथमिक से लेकर स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों तक शिक्षा प्रदान करने का उत्कृष्ट रिकॉर्ड रखता है।

रत्न एवं आभूषण उद्योग को दिया नया आयाम
नवरतन कोठारी के कुशल नेतृत्व में केजीके समूह ने पिछले पांच दशक में रत्न और आभूषण उद्योग के परिदृश्य को बदल दिया है। उनकी विश्वसनीय सलाह के चलते समूह आज 16 देशों में उपस्थिति के साथ ही नए आयाम लिख रहा है। कोठारी ने कीमती पत्थरों और हीरों के निर्माण में अवसरों का पता लगाने के लिए रत्नों के व्यापार को आगे बढ़ाकर कंपनी का नेतृत्व किया। समूह ने प्रकृति के सबसे सुंदर रत्नों और हीरों का निर्माण शुरू किया और आज केजीके की दुनियाभर में मार्केटिंग कार्यालयों के साथ ही नौ से अधिक देशों में रत्न, हीरे और आभूषण निर्माण इकाइयां हैं। इन वर्षों में सभी के लिए सामाजिक मूल्यों को अनुकरणीय मॉडल बनाने के लिए नवरतन कोठारी के प्रयास निरंतर सतत रूप से फल-फूल रहे हैं। दुनियाभर में समूह का विस्तार स्पष्ट रूप से इसकी गवाही देता है। रूस में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा हीरा निर्माण इकाई का उद्घाटन और लुआंडा में राष्ट्रपति जोआओ लौरेंको द्वारा निर्माण इकाई का उद्घाटन इसका उदाहरण मात्र है।

दृढ़ निश्चयी, विनम्र और परोपकारी नवरतन कोठारी परोपकार और मानव सेवा के लिए आदर्श हैं

परोपकार ही वास्तविक संतोष
कोठारी को निराश्रितों की मुस्कान और समाज के उत्थान में आनंद मिलता है। वे मानते हैं कि जीवन में वास्तविक संतोष परोपकार से ही आता है। दृढ़ निश्चयी, विनम्र और परोपकारी नवरतन कोठारी परोपकार और मानव सेवा के लिए आदर्श हैं। वे शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, विरासत संरक्षण सहित अन्य क्षेत्रों में लगातार अपना योगदान दे रहे हैं और अपने साथियों को भी इसके लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका उद्देश्य समाज के कमजोर तबके के जीवन में परिवर्तन और सुधार लाना है। कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने 70 हजार से अधिक जरूरतमंद लोगों को तैयार भोजन, राशि और दैनिक आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित कराई। वहीं संकट का समाधान करते हुए प्रदेश की सरकार को सौ से अधिक ऑक्सीजन कंसट्रेटर भी दान दिए।

बेहतरीन चिकित्सा सुविधाएं देने की कल्याणकारी पहल
कैंसर रोगियों की असहनीय पीड़ा और आघात में लगातार बढ़ोतरी ने स्वास्थ्य देखभाल के समर्थक नवरतन कोठारी को वर्ष 1996 में जयपुर में भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर स्थापित करने के लिए प्रेरित किया। एनएबीएच मान्यता प्राप्त यह संस्थान कैंसर की रोकथाम, उपचार, शिक्षा और अनुसंधान सहित एक छत के नीचे उसका संपूर्ण समाधान प्रदान करता है। वर्ष 1996 में शुरू हुई यह यात्रा अपने निर्धारित दर्शन और लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए अधिक से अधिक दृढ़ संकल्प और गति के साथ आगे बढ़ रही है। केजी कोठारी मेमोरियल ट्रस्ट की ओर से प्रबंधित बीएमसीएचआरसी उत्तर भारत में अपनी तरह के सबसे बड़े और सुसज्जित अस्पतालों में से एक है। यह 350 बिस्तरों वाला अत्याधुनिक कैंसर उपचार केंद्र जल्द ही 500 बिस्तरों में अपग्रेड किया जाएगा। स्थानीय निवासी ही नहीं यहां पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और गुजरात सहित दूसरे राज्यों से भी मरीज इस जानलेवा बीमारी के इलाज के लिए यहां आते हैं। अस्पताल के अध्यक्ष के रूप में कोठारी अस्पताल की सेवाओं के साथ-साथ इसकी सुविधाओं की बढ़ोतरी में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं। इन्होंने दूर-दराज के शहरों से आने वाले मरीजों के आवास की परेशानियों को दूर करने में प्रभावी सहायता की है। यह न केवल बीपीएल श्रेणी के रोगियों का इलाज करवा रहे हैं, बल्कि कमजोर तबके के मरीजों को भारी रियायती लागत पर इलाज उपलब्ध कराते हुए समाज के पिछड़े लोगों की मदद करते हैं। नवरतन कोठारी की निरंतर देखरेख में शुरू की गई कल्याणकारी पहल वास्तव में संस्था के मूल उद्देश्य निस्वार्थ भाव से मानव जाति की सेवा करने को परिभाषित करती है। इनका उद्देश्य कैंसर रोगियों को ऐसे वातावरण में सबसे उन्नत चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करना है, जो मुख्य रूप से मानवता, करुणा और देखभाल पर केंद्रित हो। उनका दृढ़ विश्वास है कि बड़े पैमाने पर जीवन को प्रभावित करने वाले कारणों के प्रति समर्थक और सहयोगी के रूप में जिम्मेदारियों और भूमिकाओं को निभाना जरूरी है। वे अपनी एक सदी से भी अधिक पुरानी विरासत को सामाजिक रूप से जिम्मेदार तरीके से संचालित करने और विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका मानना है कि सफलता जीवन का पड़ाव मात्र है और इसे पाने के लिए चुनौतियां ईंधन का काम करती है।

नवरतन कोठारी शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, विरासत संरक्षण सहित अन्य क्षेत्रों में लगातार अपना योगदान दे रहे हैं

विरासत का संरक्षण
नवरतन कोठारी वैसे तो वैश्विक व्यापार समूह केजीके पर अपना प्रभुत्व रखते हैं, लेकिन उनकी आत्मा अभी भी अपनी मातृभूमि जयपुर में निहित है। कोठारी हर वो काम करने में विश्वास रखते हैं जो उनके मूल स्थान को वापस देने की इच्छा रखता है। उन्होंने न केवल जयपुर को एक बेहतर शहर बनाने का हर अवसर लिया, बल्कि इस ऐतिहासिक शहर की समृद्ध विरासत के संरक्षण के लिए नए रास्ते बनाए। अपनी तरह की पहली जलमहल परियोजना इस बात का एक शानदार उदाहरण है कि कैसे सार्वजनिक क्षेत्र और गतिशील निजी क्षेत्र के बीच एक उत्पादक तालमेल आगे का रास्ता दिखा सकता है। जीर्ण-शीर्ण जलमहल का कायाकल्प शहर की विरासत के लिए कोठारी के प्रेम का जीवंत प्रमाण है। किसी भी व्यावसायिक हित से दूर, जयपुर की समृद्ध विरासत के साथ भावनात्मक जुड़ाव ने उन्हें इस कठिन कार्य को करने के लिए प्रेरित किया। जलमहल का जीर्णोद्धार शहर की विरासत के बुनियादी ढांचे के संरक्षण में उनकी रुचि आधार है। नवरतन कोठारी ने हर क्षेत्र में अपनी चमक बिखेरी है, फिर चाहे वह व्यवसाय, शिक्षा, परोपकार, आतिथ्य या स्वास्थ्य देखभाल हो। युवा नवरतन कोठारी ने 1970 के दशक में जयपुर से चेन्नई तक जो यात्रा की थी, वह समाप्त नहीं हुई है, बल्कि उनके सपनों की उड़ान को नए मुकाम पर पहुंचा रही है। रियल एस्टेट, आतिथ्य, मनोरंजन, विरासत संरक्षण और पर्यावरण पुनरुद्धार के साथ आज यह समूह वैश्विक हो गया है।

शिक्षा के क्षेत्र में अनुकरणीय योगदान
नवरतन कोठारी शिक्षा का प्रकाश भी बिखेर रहे हैं। दशकों से सुबोध शिक्षा समिति के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने जयपुर शहर और उसके आसपास हजारों बच्चों को तैयार किया है। वर्ष 1918 में सिर्फ 4 छात्राओं के साथ शुरू हुई सुबोध शिक्षा समिति में अब प्ले ग्रुप से लेकर एमबीए और पीजी तक के 17 संस्थान हैं। जहां सालाना 33 हजार से अधिक विद्यार्थी शिक्षा ले रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने मान्यता प्राप्त केजीके अकादमी की स्थापना भी की, जो रत्न और हीरे के क्षेत्र में व्यावहारिक पाठ्यक्रम प्रदान करता है। स्थापना के बाद से संस्थान ने पांच हजार से अधिक छात्रों को रंगीन रत्नों, हीरे और आभूषण के क्षेत्र में विशेषज्ञ के रूप में स्थापित किया है। कोठारी शिक्षण और कौशल विकास को शब्दों के माध्यम से अभिव्यक्त करने के बजाय प्रतिभाशाली कारीगरों और पेशेवरों की अपनी टीम को मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। उनकी व्यावसायिक कुशाग्रता और नई पीढ़ी को ज्ञान प्रदान करने की भावना निरंतर प्रेरणा स्रोत रही है। कोठारी हमेशा व्यक्तियों के व्यावसायिक विकास के प्रति जुनूनी रहे हैं। वह हर क्षेत्र के जीवन की गुणवत्ता और आजीविका में सुधार के लिए गुणवत्तायुक्त प्रशिक्षण और कौशल वृद्धि प्रदान करना चाहते हैं। केजीके समूह ने व्यक्तियों को नेतृत्वकर्ता में बदलने के लिए रत्न और हीरा क्षेत्र में बहुत से विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया है, जो आज दुनियाभर में आत्मनिर्भर और अग्रणी संस्थान के रूप में स्थापित हो गए हैं।

रियल एस्टेट में बढ़ते कदम
नवरतन कोठारी ने रियल एस्टेट में विभिन्न संभावनाओं के साथ एक उत्साही, दूरदर्शी और विभिन्न शैलियों के साथ प्रयोग किया है और उनमें उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। केजीके रियल्टी इसका एक और उदाहरण है। उनके व्यापार कौशल ने केजीके रियल्टी को रियल एस्टेट में ऊंचाइयां दी हैं। कोठारी ने अत्यधिक पारदर्शिता और सर्वोत्तम गुणवत्ता के साथ ग्राहक की सेवा करने के भाव के साथ केजीके समूह को देशभर में सबसे नैतिक, ग्राहक-केंद्रित और उच्चतम क्षमता वाले रियल एस्टेट संगठन के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कोठारी व्यावसायिक उन्नति पर ध्यान केंद्रित करते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें ग्राहकों की संतुष्टि से समझौता मंजूर नहीं। दूरदृष्टि, करुणामयी भावना, अटूट आत्मविश्वास, व्यापारिक चतुराई और नवरतन कोठारी के विशाल अनुभव ने केजीके रियल्टी को रियल एस्टेट उद्योग के वैश्विक मानकों के बराबर लाने में मदद की है।